रमण जो की एक मध्यमवर्गीय परिवार का सदस्य, एक छोटे से क़स्बा में रहता है, अपने आप में तो वह बचपन से ही खोया रहता था अपने हमउम्र बच्चो में से कोई दो या तीन ही थे जो उसके दोस्त थे या ये कहले जिनका वो दोस्त था न किसी से कोई मतलव न किसी से बोलचाल अपने आप में मस्त रमण "पाँचवी" पास कर चूका था; रमण जो की एक मध्यमवर्गीय परिवार से है उसके परिवार में पाँच सदस्य है रमण, रमण के माता-पिता और दो छोटे भाई-बहिन, रमण के पिता एक सामाजिक संगठन के सदस्य है और पाँचवी करने के बाद अपनी पड़ाई के साथ साथ रमण अपने पिता के साथ संगठन में रूचि लेने लगा और सातवी तक आते आते रमण को उस संगठन में एक छोटा सा पद मिल गया सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था
रमण अब दसवी में प्रवेश ले चुका है और यही से कहानी की शुरुआत होती है
दसवी में रमण पहुच तो गया पर उसकी जिन्दगी वैसी की वैसी ही चल रही है थी कि\ एक दिन उसकी जिन्दगी ने करवट ली उसकी दोस्ती कुछ शरारती बच्चो से हो गई
तीन महीने बाद रमण अब वो रमण नही था जो की वो बचपन से था अब वो किसी से भी उलझ जाता था सभी उससे परेशान थे रमण अब पड़ता भी नही था न ही संगठन के कार्य करता बस उसे सिर्फ शरारत सूझती हर वक्त अब यही सब चल रहा था उसकी जिन्दगी में की उसकी जिन्दगी ने एक बार फिर करवट ली वो अब तक ग्यारवी में प्रवेश ले चूका है और उसके कुछ नए दोस्त भी बने है दसवी से बारहवी तक की उम्र बेहद दिलचस्प होती है ये तो सभी मानते है अब एक दिलचस्प घटना घटने वाली थी रमण की जिन्दगी बदलने वाली थी दीपाली नमक एक रूपवान छात्रा उसके साथ ही ग्यारवी में पड़ने आई थी उसी विद्यालय में इत्तेफाक से उन दोनों का प्रवेश भी एक साथ ही हुआ था पड़ने के लिए
कुछ दिन सब जैसे का तैसा ही चलता रहा पर धीरे धीरे समय ने करवट ली अब तक दीपाली रमण के दिलोदिमाग में घर कर गई थी रमण के नए मित्र जो इसी विद्यालय में बने थे उसी की कक्षा में पड़ते थे ने उसे कहा की वो दीपाली को अपने प्रेम का इजहार करे....
और
एक दिन रमण ने मौका देखकर दीपाली को अपने प्रेम का इजहार किया दीपाली ने स्पष्ट मन कर दिया क्योकि शहरो की अपेक्षा गाँव में लड़के लडकियों की दोस्ती उनका मिलना जुलना प्रेम प्रसंग ये ठीक नही मने जाते उसका एक कारन यह भी है की ये सब मन मर्यादा के अंतर्गत आते है गाँवो मन अगर कोई लड़का लड़की प्रेम करते है तो यह परंपरागत इज्जत पर प्रतिघात माना जाता है गाँवो में वहा ये सब वैध नही मानते मानते कारन जो भी हो पर ये सब गाँवो में ठीक नहीं और अगर कोई एसा दुस्साहस करता है तो कठोर सजा मिलती है उसे
फेसबुक पर अधूरी प्रेम कहानिया
रमण दीपाली के इंकार को सह न सका और उसके दोस्त भी लफंगे टाइप के थे उसके दोस्तों ने उसे ( दीपाली को ) परेशान करने की सलाह दी रमण अब दीपाली को तंग करने लगा, उसे गाँव गली मोहल्ले बाज़ार क्लास जहाँ भी अकेला देखता उसे तंग करता उसे उससे मोहब्बत करने को कहता न ही तो परिणाम भुगतने की धमकी देता दीपाली इन सबसे बहुत डिस्टर्ब रहने लगी उसकी फ्रेंड्स भी जानते थे ये सब पर रमण से कौन क्या कहे फिर एक दिन उन्होंने टीचर से शिकायत करने की ठानी
दीपाली और उसकी फ्रेंड्स ने रमण की शिकायत टीचर से की टीचर ने रमण को वोर्निंग देकर छोड़ दिया पर रमण न माना रमण अब दीपाली को और तंग करने लगा पर दीपाली भी हर न मानने वाली लड़की थी उसने भी अब रमण को सबक सिखाने की ठान ली यहाँ मै आपको ये बता दू की दीपाली रमण के ही पास के गाँव के एक माध्यमवर्गीय परिवार से थी
2 महीने बाद
अब दीपाली और रमण अच्छे दोस्त थे पर दीपाली का मकसद साफ था रमण को सबक सिखाना पर रमण अपने में मस्त उसे लग रहा था कि दीपाली भी उससे मोहब्बत करने लगी है ऐसे ही दिन बिताते गये दीपाली भी अपने मकसद में कामयाव होने लगी फिर एक दिन दीपाली रमण से दोस्ती तोड़कर अपने गाँव चली गई रमण एकदम अकेला पड गया रमण को समझ ही नही आया कि हुआ क्या है
अब रमण पागलो की तरह दीपाली की तलाश करने लगा रमण के दोस्त उसे ताने मरने लगे कल तक जो रमण दुसरो को परेसान करता था आज वह खुद दुसरो से बचने के उपाय खोजने लगा रमण दीपाली के प्रेम में पागल हो चूका था फिर एक दिन दीपाली मिली दीपाली ने उसे बताया कि वह महीने भर के लिए अपने मामा जी के यह गई थी
दीपाली और रमण का प्रेम
दीपाली रमण को सबक सिखाने में तो कामयाब हो रही थी पर उसके दिल भी अब रमण को चाहने लगा था शायद दीपाली भी अब रमण के ख्वाव देखने लगी थी या शायद कहते नही है कि रास्ते पर साथ चलते चलते अजनवी भी दोस्त ban जाते है ये उसी का असर था पर जो भी था ये अब दीपाली को भी अच्छा लगने लगा था रमण का साथ अब वो रमण को सबक सिखाने के चक्कर में न रहकर उसे एक अच्छा इन्सान बनाना चाहती थी जो उसके काबिल हो जिससे उसके घर वाले शादी करदे उनकी उसने रमण को एक अच्छा इन्सान बनने की सलाह दी रमण भी अब दीपाली के लिए कुछ भी करने को तैयार था सब कुछ अच्छा चल रहा था कि
और एक और अधूरी कहानी
तभी दीपाली को मालूम हुआ की उसके घरवाले उसके लिए लड़का ढूढ रहे है अब उन्दोनो के पास बहुत ही कम समय बचा था अब क्या करे पर अभी भी कुछ ज्यादा देर नही हुई थी पर अब उन्हें समझ ही नही आरहा था की क्या करे न ही उन्हें कोई समझाने वाला था फिर वो अपनी तरफ से पूरी कोशिश करने में लगे था अपने रिश्ते को बचने में और ऐसे ही छः महीने बीत गये और धीरे धीरे वो दिन भी आ गया जब दीपाली की विदा हो गई और एक और प्रेम कहानी अधूरी रह गई..............
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कुछ दिन सब जैसे का तैसा ही चलता रहा पर धीरे धीरे समय ने करवट ली अब तक दीपाली रमण के दिलोदिमाग में घर कर गई थी रमण के नए मित्र जो इसी विद्यालय में बने थे उसी की कक्षा में पड़ते थे ने उसे कहा की वो दीपाली को अपने प्रेम का इजहार करे....
और
एक दिन रमण ने मौका देखकर दीपाली को अपने प्रेम का इजहार किया दीपाली ने स्पष्ट मन कर दिया क्योकि शहरो की अपेक्षा गाँव में लड़के लडकियों की दोस्ती उनका मिलना जुलना प्रेम प्रसंग ये ठीक नही मने जाते उसका एक कारन यह भी है की ये सब मन मर्यादा के अंतर्गत आते है गाँवो मन अगर कोई लड़का लड़की प्रेम करते है तो यह परंपरागत इज्जत पर प्रतिघात माना जाता है गाँवो में वहा ये सब वैध नही मानते मानते कारन जो भी हो पर ये सब गाँवो में ठीक नहीं और अगर कोई एसा दुस्साहस करता है तो कठोर सजा मिलती है उसे
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रमण दीपाली के इंकार को सह न सका और उसके दोस्त भी लफंगे टाइप के थे उसके दोस्तों ने उसे ( दीपाली को ) परेशान करने की सलाह दी रमण अब दीपाली को तंग करने लगा, उसे गाँव गली मोहल्ले बाज़ार क्लास जहाँ भी अकेला देखता उसे तंग करता उसे उससे मोहब्बत करने को कहता न ही तो परिणाम भुगतने की धमकी देता दीपाली इन सबसे बहुत डिस्टर्ब रहने लगी उसकी फ्रेंड्स भी जानते थे ये सब पर रमण से कौन क्या कहे फिर एक दिन उन्होंने टीचर से शिकायत करने की ठानी
दीपाली और उसकी फ्रेंड्स ने रमण की शिकायत टीचर से की टीचर ने रमण को वोर्निंग देकर छोड़ दिया पर रमण न माना रमण अब दीपाली को और तंग करने लगा पर दीपाली भी हर न मानने वाली लड़की थी उसने भी अब रमण को सबक सिखाने की ठान ली यहाँ मै आपको ये बता दू की दीपाली रमण के ही पास के गाँव के एक माध्यमवर्गीय परिवार से थी
2 महीने बाद
अब दीपाली और रमण अच्छे दोस्त थे पर दीपाली का मकसद साफ था रमण को सबक सिखाना पर रमण अपने में मस्त उसे लग रहा था कि दीपाली भी उससे मोहब्बत करने लगी है ऐसे ही दिन बिताते गये दीपाली भी अपने मकसद में कामयाव होने लगी फिर एक दिन दीपाली रमण से दोस्ती तोड़कर अपने गाँव चली गई रमण एकदम अकेला पड गया रमण को समझ ही नही आया कि हुआ क्या है
अब रमण पागलो की तरह दीपाली की तलाश करने लगा रमण के दोस्त उसे ताने मरने लगे कल तक जो रमण दुसरो को परेसान करता था आज वह खुद दुसरो से बचने के उपाय खोजने लगा रमण दीपाली के प्रेम में पागल हो चूका था फिर एक दिन दीपाली मिली दीपाली ने उसे बताया कि वह महीने भर के लिए अपने मामा जी के यह गई थी
दीपाली और रमण का प्रेम
दीपाली रमण को सबक सिखाने में तो कामयाब हो रही थी पर उसके दिल भी अब रमण को चाहने लगा था शायद दीपाली भी अब रमण के ख्वाव देखने लगी थी या शायद कहते नही है कि रास्ते पर साथ चलते चलते अजनवी भी दोस्त ban जाते है ये उसी का असर था पर जो भी था ये अब दीपाली को भी अच्छा लगने लगा था रमण का साथ अब वो रमण को सबक सिखाने के चक्कर में न रहकर उसे एक अच्छा इन्सान बनाना चाहती थी जो उसके काबिल हो जिससे उसके घर वाले शादी करदे उनकी उसने रमण को एक अच्छा इन्सान बनने की सलाह दी रमण भी अब दीपाली के लिए कुछ भी करने को तैयार था सब कुछ अच्छा चल रहा था कि
और एक और अधूरी कहानी
तभी दीपाली को मालूम हुआ की उसके घरवाले उसके लिए लड़का ढूढ रहे है अब उन्दोनो के पास बहुत ही कम समय बचा था अब क्या करे पर अभी भी कुछ ज्यादा देर नही हुई थी पर अब उन्हें समझ ही नही आरहा था की क्या करे न ही उन्हें कोई समझाने वाला था फिर वो अपनी तरफ से पूरी कोशिश करने में लगे था अपने रिश्ते को बचने में और ऐसे ही छः महीने बीत गये और धीरे धीरे वो दिन भी आ गया जब दीपाली की विदा हो गई और एक और प्रेम कहानी अधूरी रह गई..............
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